सुखासन : मन को शांत करता है, आसन में सुधार करता है |
योग करने से दिमाग को तो शांति मिलती ही है साथ ही शरीर में स्वस्थ रहता है। कपालभाति से लेकर प्राणायाम करने के लिए सुखासन में बैठने की सलाह दी जाती है। दरअसल, जब हमारा शरीर सुखासन की मुद्रा में बैठता है तो शरीर की निगेटिव एनर्जी खत्म होती है और स्ट्रेस दूर भागता है। इसलिए आयुर्वेद में सुखासन की मुद्रा में बैठकर खाने की सलाह दी जाती है। हर दिन अगर आप 10 मिनट सुखासन की मुद्रा में बैठते हैं तो इसके काफी सारे फायदे होते हैं।
👍कैसे करे सुखासन मुद्रा योग..
👉सबसे पहले पैरों को आगे की तरफ करें और बैठ जाएं।
👉फिर बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाहिने जांघ के नीचे दबाएं।
👉फिर दाएं पैर को घुटने से मोड़कर बांए जांघ के नीचे दबाएं।
👉बॉडी और पैर को एडजस्ट कर आराम से बैठ जाएं।
👉अब, कमर, गर्दन, सिर और रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीथा करें।
👉हथेलियों को जांघ के ऊपर रखें। कंधों को रिलैक्स रखें।
👉आंखें बंद करें और गहरी सांस लें।
👉कुछ मिनट इसी मुद्रा में बैठें.
🔷सुखासन की मुद्रा में बैठना शरीर को फ़्लेक्सिबल बनाने और तनाव को कम करने में मदद करता है.
🔷सुखासन की मुद्रा में रोज 10 से 20 मिनट बैठने से रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है और शरीर का पोस्चर नहीं बिगड़ पाता। साथ ही पीठ की हड्डियों को मजबूती मिलती है।
🔷सुखासन की मुद्रा में बैठकर अगर हर दिन खाना खाया जाए तो डाइजेशन सही होता है। दरअसल, सुखासन की मुद्रा में बैठने से लोअर एब्डॉमिन में ब्लड का फ्लो सही तरीके से हो पाता है और डाइजेशन में मदद मिलती है।
🔷सुखासन की मुद्रा में बैठिने से हिप ओपन होते हैं और किसी भी तरह के नस के खिंचाव से छुटकारा मिलता है। ये पैरों और हिप की मसल्स को फ्लैक्सिबल बनाता है। पैरों को क्रॉस करके घुटने से मोड़कर बैठने से शरीर की टेंशन निकलती है और घुटने की मसल्स फ्लैक्सिबल हो जाती है।
🔷सुखासन की मुद्रा में बैठने से ब्लड प्रेशर को डाउन करने में मदद मिलती है। बच्चों की हाईट बढ़ने में मदद होती है। सुखासन में बैठने से कंधे और सीने को ओपन होने में मदद मिलती है।